Shayari n Shayari

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Sangdil

संग’दिल से लगाकर दिल का लौ वैसे पछताना पड्ता है
सय्याद के हाथों जैसे बुल’बुल को तडप’ना पड्ता है
गम-ए-इश्क को लेकर सीने में आशिक को जीना पड्ता है
है इश्क मोहब्बत खेल नहीं घुट-घुट कर मर’ना पड्ता है
ये रोग उल्फ़त का आशिक को भुगत’ना पड्ता है
और दर्द बढाने वाले को ही मर्ज़ बताना पड्ता है
इश्क की खातिर हर हद से गुज़र’ना पड्ता है
दिल देकर तन्हाई का ही बस सौदा कर’ना पड्ता है

Kuch Yaad Nahin

तेरे आने कि आहट सुनि थि मैने
और फिर तुम'से हुई क्या बात, कुछ याद नहीं
तुम'से मिल'कर जो मैने कुछ गीत लिखे थे
कैसे थे वो नग्में, कुछ याद नहीं
पिछ्ली बारिश मैं झूम के बर'सा था सावन
अब के कैसे गुज'री है बर'सात, कुछ याद नहीं
कुछ खोये से थे तुम, कुछ खोये से थे हम
कैसे गुज'रे वो लम्हें, कुछ याद नहीं
बेखुदि बधं सि गयी जब प्यार हुआ तुम'से
कित'ने मासूम थे वो जज'बात, कुछ याद नहीं
तुम'ने फूलों कि महक दि या काटों कि चुभन
क्या तुम'ने दिया सौगात, कुछ याद नहीं
तुम मिले कब और कब जुदा हो गये
कहाँ तुम'से हुई थि मुलाकात, कुछ याद नहीं

Aap

आप मेरी नज़'रों से दुर हैं
पर मेरे दिल के बाहर नहीं
आप मेरी पोहँच से बाहर हो सक'ती हैं
पर आप मेरी सोच के बाहर नहीं
मैं आप'के लिये कुछ भि नहीं
पर आप मेरे लिये सब कुछ हैं

Tanhayee

तन्हाई से इस कदर परेशान हुँ
लग'ता है अप'ने से अजांन हुँ
हर वक्त सोच मैं डूबा रह्ता हुँ
कोइ नहीं है मेरा, बस य'ही सोच'ता हुँ
जब भी मैं उस'की जुदाई याद कर'ता हुँ

Agar Ho Sake

मुझे भुल जाना अगर हो सके
मत याद कर'ना अगर हो सके
रहे याद क्यों भुल जाने कि बात
ना कभी आसुँ बहना अगर हो सके
मुझे माफ़ कर'ना मेरे हुम'सफ़र
कहीं खो गया मैं तुम्हे खो कर
मैने तुम्हे गम दिय है मगर
सदा मुस्कुराना अगर हो सके
मत याद कर'ना अगर हो सके

Tanha

प्यास दरिया कि निगाहों से छिपा रखि है
एक बादल से बडी आस लगा रखि है
तेरी आखों की कशिश कैसे तुझे सम'झाउँ
इन चार'गों ने मेरी नीदं उडा रखि है
तेरी बातों को छुपाना नहीं आता मुझे
तुने खुश'बू मेरे लह्ज़े में बसा रखि है
खुद को तन्हा ना समझ लेना नये दीवानों
नींद शह'रों की उस'ने उडा रखि है

Teri Yaadein

बडे खुब’सूरत लिवासे सदल पे
ये पत्ते हवा में बिखर’ने से पह’ले
हरेक राह में तेरी यादें बिछी है
कदम डग’मगाये गुजर’ने से पह’ले
ना जाने वे कब से नज़र में बसा था
तेरा नक्श दिल पर उभर’ने से पह’ले
ना आये कयामत से पह’ले कयाम
ज़रा सोच लेना सम्हल’ने से पह’ले

Pyar Se Jo Humse Mila Nahin Karte

सिर्फ़ हक पर चल नहीं कर’ते
वर’ना कुछ लोग क्या नहीं कर’ते
कर’ते जाते है हर घडी वादा
वो जो वादा वफ़ा नहीं कर’ते
सिर्फ़ रस्मो का हक निभाते हैं
काम कुछ भी नया नहीं कर’ते
जान देते है हम वसुलों पर
हुस्न पर हम मरा नहीं कर’ते
उन’से कह देना की आयना देखे
प्यार से जो हम’से मिला नहीं कर’ते

Meri Zindagi

जिन्दगी कि उल’झनों में उलझ’ता रहा
बस उस’के प्यार के लिये हर’दम तरस’ता रहा
जान’ता था वो शायद हि कभी मुझे हासिल होगी
फिर भि झुठे दिलासे से दिल बह’लाता रहा
सोचा था कभी तो वक्त मेरे साथ होगा
पर वो भी रेत कि तरह मेरे हाथ से फ़िसल’ता रहा
शायद,
खुदा को ये भि ना मज़ुंर था आखों में कैद करूँ उस’के अक्स को
इस’लिये तो हर लम्हा पानी कि तरह मेरी आखों से बेह्ता रहा

Dil Mein

बादल बन’के धर’ती की प्यास बुझाने को फिर’ता हुँ
दिल में उस से मिल’ने कि आस लिये फिर’ता हुँ
मुझ’को अलग किया दुनिया ने तरह तरह से
फिर भी उस’को पाने के विश्वास लिये फिर’ता हुँ